कोर्स 02- गतिविधि 1 : अपने विचार साझा करें

 

प्रारंभिक वर्षों में बच्चों को आपके द्वारा दिए गए अनुभवों पर विचार करें। क्या सभी बच्चों को समान शि‍क्षण प्रदान किया जा रहा है और उनकी निश्‍चि‍त परीक्षण सारणी है या सीखने में विविधता को ध्‍यान में रखा जाता है? आपके विचार में शि‍क्षार्थी केंद्रित पद्धति के प्रयोग के क्या लाभ/सीमाएँ हैं?

 अपने विचार साझा करें।

Comments

  1. प्रारंभिक वर्षों में बच्चों को आपके द्वारा दिए गए अनुभवों पर

    ReplyDelete
    Replies
    1. समय और अनुभवी शिक्षिकाजरुरी है |

      Delete
    2. वर्तमान समय शिक्षार्थी की क्षमता के अनुरूप शिक्षा देने पर बहुत बल दिया जा रहा है, और पाठ्यक्रम निर्धारित होता है परंतु उसमें लचीलापन
      अभी देखने में नहीं मिलता येनकेन प्रकारेण शिक्षक को उसे पूरा कराना ही रहता है l प्रायोगिक रूप में खेल खेल में सीखना और क्षमता के अनुरूप सीखना अभी परिलक्षित नहीं होता l

      Delete
  2. बच्चों की शिक्षण हेतु समय सारिणी तो जरुर हो, परन्तु बच्चे अपने स्तर के अनुसार ही विषयवस्तु सीख पायें तो उसे पर्याप्त समय लेने दें इस तरह बाल केन्द्रीय पद्धति से ही वह सीख पायेगा।

    ReplyDelete
  3. बच्चों के लिए नियमित पाठ्यचर्या का चयन उनकी मनपसंद एवं रूची के अनुकूल हो और उन्हें स्वतन्त्र रूप से सीखने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए इस हेतु एक शिक्षक ने केवल facilitator का कार्य करें बल्कि उनकी सुरक्षा का ध्यान भी रखें।

    ReplyDelete
  4. बच्चों के निरंतर विकास के एक पथ है |

    ReplyDelete
  5. Syllabus should be designed for n such a way that each and every level of children enjoys learning. With the help of different teaching activities and teaching aids should be used to make learning more interesting

    ReplyDelete
  6. बच्चों के स्तर के अनुसार पाठ्यक्रम निर्माण करना चाहिए उनके ऊपर भार नहीं डालना चाहिए , खेल- खेल में समझाना चाहिए साथ ही उनके दैनिक जीवन के अनुसार उन्हें सीखना चाहिए

    ReplyDelete
  7. This is the best way for teaching. Childhood is very important

    ReplyDelete
  8. Expirmental learning is more important.

    ReplyDelete
  9. हर बच्चे की सीखने की अपनी अलग क्षमता होती है। ऐसे बच्चों के लिए विषय को समय सीमा में न बांधा जाए और उनकी ओर विशेष ध्यान दिया जाए।

    ReplyDelete
  10. वर्तमान समय शिक्षार्थी की क्षमता के अनुरूप शिक्षा देने पर बहुत बल दिया जा रहा है, और पाठ्यक्रम निर्धारित होता है परंतु उसमें लचीलापन
    अभी देखने में नहीं मिलता येनकेन प्रकारेण शिक्षक को उसे पूरा कराना ही रहता है l प्रायोगिक रूप में खेल खेल में सीखना और क्षमता के अनुरूप सीखना अभी परिलक्षित नहीं होता l

    ReplyDelete
  11. शिक्षार्थी केंद्रित शिक्षा के लाभ अनेक हैं परंतु इस ओर अग्रसर होने हेतु बहुत सी चुनौतियों का सामना करना होगा यथा प्रशिक्षित शिक्षक व कक्षा में छात्रों की संख्या निर्धारण एवं वातावरण का निर्माण l

    ReplyDelete
  12. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  13. सबसे पहले हमें बच्चों की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए कि उसकी बुद्धि कहां तक ज्ञान प्राप्त कर सकती हैं फिर हमें उसे देख कर आगे बढ़ना चाहिए और उस पर अत्यधिक ध्यान देना चाहिए पाठ्यक्रम का खत्म करने का मकसद यह नहीं होता है कि हमें कोर्स जल्दी करना है हमें देखना है कि बच्चों को समझ में आया या नहीं आया उसके स्तर के अनुसार हमें आगे बढ़ना चाहिए बच्चों में यह भी देखना है कि बच्चा किस विषय में सबसे ज्यादा अपना इंटरेस्ट रखता है अपनी क्वालिटी बताता है या उसकी क्वालिटी देखना चाहिए उसके अनुसार उसे आगे बढ़ना और शिक्षा देना चाहिए।

    ReplyDelete
  14. बच्चों के स्तर के अनुसार पाठ्यक्रम निर्माण करना चाहिए उनके ऊपर भार नहीं डालना चाहिए , खेल- खेल में समझाना चाहिए साथ ही उनके दैनिक जीवन के अनुसार उन्हें सीखना चाहिए I
    इस हेतु एक शिक्षक ने केवल facilitator का कार्य करें बल्कि उनकी सुरक्षा का ध्यान भी रखें।

    ReplyDelete
  15. शिक्षार्थी केंद्रित पद्धति पर ज़ोर प्राचीन समय से ही अनेक शिक्षाविदों द्वारा दिया जाता रहा है और आज भी उसी बात को महत्व दिया जा रहा है। इसे लागू करने के लिए सबसे पहले छात्र- शिक्षक अनुपात का कम होना बहुत ही आवश्यक है ताकि शिक्षक प्रत्येक छात्र को समय और ध्यान दे सके और उसके विकास को सर्वांगीण बनाने में अपना योगदान दे सके।

    ReplyDelete
  16. इस बात से तो सभी सहमत होंगे कि हर बच्चे में सीखने की क्षमताअलग-अलग होती है। हमें बच्चों में तुलना नहीं करनी चाहिए। हर बच्चे पर ध्यान देने के लिए यह आवश्यक है कि एक कक्षा में 20-25 बच्चों को प्रवेश दिया जाय। तभी हर बच्चे पर ध्यान देना संभव है।

    ReplyDelete
  17. बच्चों के पूर्ण शिक्षण के लिए निश्चित परीक्षण सारणी होनी चाहिए | लेकिन बच्चे अपने स्थर अनुसार ही विषयवस्तु सीख पाते हैं | उन्हें पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए ताकि वेश्या केंद्रीय पद्धति के अनुसार सीख सकें |

    ReplyDelete
  18. यदयपि सभी बच्चों को समान शिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए परंतु ये भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चे का स्तर उस शिक्षण को ग्रहण करने का है या नही। इस लिए प्रशिक्षण सारणी का होना भी आवश्यक है। प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता अलग अलग होती है। इसलिए शिक्षार्थी केन्द्रित पद्धति का प्रयोग अनिवार्य है।

    ReplyDelete
  19. सभी छात्रों को समान पाठ्यक्रम समान समय में पूरा करने की बाध्यता होती है शिक्षार्थी के स्तर अनुसार शिक्षा पद्धति एक सार्थक और आवश्यक कदम है, परंतु इसमें बहुत सी चुनौतियाँ हैं जैसे - छात्रों की संख्या, शिक्षकों का प्रशिक्षण, कक्षा की सहायक सामग्री व वातावरण आदि पुरानी पद्धति से पढ़े हुए अभिभावक l

    ReplyDelete
  20. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  21. Baccho keep. Sampurn Vilas keep literally jaruri. Hai kuch class me. B a c how kids. Sankhya. Lame ho. Taking. Adhyapak sabhi b a c how. Per pura. Dhyan. De. Sake. Unlike. Jar u r a to. Love. Samagh sake.

    ReplyDelete
  22. सभी बच्चों को समान शि‍क्षण प्रदान किया जा रहा है इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है शिक्षक :शिक्षार्थी अनुपात | भारत में यह सबसे बड़ी चुनौती है | प्रारंभिक वर्षों में बच्चों को विशेष ध्यान और देखभाल की आवश्यकता होती है ,इसके लिए उचित सहायक सामग्री तथा वातावरण का निर्माण भी आवश्यक है ताकि शिक्षण -अधिगम बच्चों की रुचि तथा स्तर के अनुकूल हो सकें |

    ReplyDelete
  23. सभी बच्चो को समान शिक्षा प्रदान किया जा रहा है| बच्चों को समान शिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए परंतु ये भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चे का स्तर उस शिक्षण को ग्रहण करने का है या नही। इस लिए प्रशिक्षण सारणी का होना भी आवश्यक है। प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता अलग अलग होती है। इसलिए शिक्षार्थी केन्द्रित पद्धति का प्रयोग अनिवार्य है।

    ReplyDelete
  24. हर बच्चे की सिखाने की क्षमता तथा रुचियाँ अलग अलग होती है , तथा उनके सीखने की गति भी भिन्न होती है Iसमयबद्ध मूल्याङ्कन शायद बच्चों की योग्यता का सही मापन नहीं कर पायेगा..I

    ReplyDelete
  25. सबसे पहले हमें बच्चों की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए कि उसकी बुद्धि कहा तक ज्ञान प्राप्त कर सकती हैं l हमें देखना है कि बच्चों को समझ में आया या नहीं आया उसके स्तर के अनुसार हमें आगे बढ़ना चाहिए l बच्चों में यह भी देखना है कि बच्चा किस विषय में सबसे ज्यादा अपनी ऋची रखता है , उसके अनुसार उसे आगे बढ़ना और शिक्षा देना चाहिए। खेल खेल में सिखाना चाहिए।

    ReplyDelete
  26. बच्चे को उसकी रुचि के अनुसार शिक्षण संस्थान देना चाहिए।

    ReplyDelete
  27. नीलम नरवाल
    व्यक्तिगत आधार हर छात्र अपने आप में एक- दूसरे से भिन्न है | यह उनके सत्र के अनुसार होना चाहिए |

    ReplyDelete
  28. Sikhane mein vividhta per Dhyan nahin Rakha jata hai unhen samanya path ke anusar hi sabhi kuchh pada jata hai

    ReplyDelete
  29. Sikhne ki Vibhinn Yogyakarta vali Kansas me ek hi pathya samagri Samast kaksha ke liye upuogi nahi Hogi .

    ReplyDelete
  30. हर बच्चे की सीखने की अपनी अलग क्षमता होती है। ऐसे बच्चों के लिए विषय को समय सीमा में न बांधा जाए और उनकी ओर विशेष ध्यान दिया जाए।
    वर्तमान समय शिक्षार्थी की क्षमता के अनुरूप शिक्षा देने पर बहुत बल दिया जा रहा है, और पाठ्यक्रम निर्धारित होता है परंतु उसमें लचीलापन
    अभी देखने में नहीं मिलता येनकेन प्रकारेण शिक्षक को उसे पूरा कराना ही रहता है l प्रायोगिक रूप में खेल खेल में सीखना और क्षमता के अनुरूप सीखना अभी परिलक्षित नहीं होता l

    ReplyDelete
  31. This is the best way of teaching

    ReplyDelete
  32. नीलम नरवाल
    सभी विद्यार्थी व्यक्तिगत आधार पर एक - दूसरे से भिन्न होते हैं | सभी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कक्षा का वातावरण प्रजातांत्रिक बनाया जाए और उसमें लचीलापन होना चाहिए |

    ReplyDelete
  33. बच्चों के निरंतर विकास के एक पथ है |हर बच्चे की सीखने की अपनी अलग क्षमता होती है। ऐसे बच्चों के लिए विषय को समय सीमा में न बांधा जाए और उनकी ओर विशेष ध्यान दिया जाए।शिक्षार्थी केंद्रित शिक्षा के लाभ अनेक हैं परंतु इस ओर अग्रसर होने हेतु बहुत सी चुनौतियों का सामना करना होगा यथा प्रशिक्षित शिक्षक व कक्षा में छात्रों की संख्या निर्धारण एवं वातावरण का निर्माण l

    ReplyDelete
  34. सबसे पहले हमें बच्चों की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए कि उसकी बुद्धि कहा तक ज्ञान प्राप्त कर सकती हैं l हमें देखना है कि बच्चों को समझ में आया या नहीं आया उसके स्तर के अनुसार हमें आगे बढ़ना चाहिए l बच्चों में यह भी देखना है कि बच्चा किस विषय में सबसे ज्यादा अपनी रूची रखता है , उसके अनुसार उसे आगे बढ़ना चाहिए।

    ReplyDelete
  35. नही प्रारंभिक समय मे बच्चो को एक ही तरह का शिक्षा मिल रहा है और इसमें सुधार होना चाहिए।

    ReplyDelete
  36. शिक्षा मे सुधार होना चाहिए

    ReplyDelete
  37. नही वर्तमान समय मे उन्हें सही शिक्षा नही मिल रही ।

    ReplyDelete
  38. नई शिक्षा नीति का गठन बच्चों की योग्यता के अनुरूप है आशा करती हूँ यह हमारी शिक्षा को नई दिशा देगी |

    ReplyDelete
  39. प्रत्येक बच्चे की अपनी दक्षता होती है । हमें उनके अनुसार उन्हें खुद को साबित करने का अवसर देना चाहिए।

    ReplyDelete
  40. बच्चों के सीखने के प्रतिफल में विविधता है अतः उनको खुद को सम्प्रेषित करने का भी अलग अवसर देना चाहिए।

    ReplyDelete
  41. बच्चों को सकारात्मक शब्दों से प्रभावित करना चाहिए

    ReplyDelete
  42. I agree with the NEP. Instead of chasing the syllabus, we should persuade the learning environment.

    ReplyDelete
  43. It is the need of the hour that the teachers as well as parents understand the NEP and implement it sincerely.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

कोर्स 04 गतिविधि 3 : पालक शिक्षक संघ की बैठक में संवाद का एक सशक्त माध्यम - अपने विचार साझा करें

कोर्स 08 : सीखने का आकलन , गतिविधि 1 : अपने विचार साझा करें

कोर्स 05 गतिविधि 5 : एक प्रिंट-समृद्ध कक्षा वातावरण की रचना करें - अपने विचार साझा करें